सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश के कुल 18 फीसदी छात्र ही 12वीं कक्षा तक पहुंच पाते हैं। यह प्रतिशत दलित और आदिवासी छात्रों के मामले क्रमशः 8 और 6 फीसदी है, जबकि पिछड़े और अल्पसंख्यक 9 से 10 फीसदी हैं। यानी 92 फीसदी दलित छात्र, 94 फीसदी आदिवासी और 90 फीसदी अल्पसंख्यक-पिछड़े छात्र उच्च शिक्षा के दरवाजे तक तो दस्तक ही नहीं दे पाते। यह भयावह स्थिति तब है जबकि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार अभी व्यापक आधार मुहैया कराये हुए है और मनमानी फीस वसूलने वाले निजी संस्थान बहुत कम हैं। इन आंकड़ो से साफ है कि सरकार देश की व्यापक आबादी को उच्च शिक्षा से वंचित रखने की साजिश कर रही है।